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Showing posts from May, 2020

"बेरोजगारी"

बेरोजगारी है एक बीमारी, जो समझाये वो अत्याचारी, मैं नही कह रहा ये सब है जानते, समझाने बाले को अपना शत्रु है मानते, बेरोजगार की भी यहाँ होती है श्रेणिया, कुछ बैठे है घर पे कुछ लगाते है रेड़िया, रेड़ी बाले तो चलो कुछ न कुछ कमाते है, घर बैठने बाले केवल ताने सुनते जाते है, घरवालों तक तो ठीक था, रिश्तेदार भी ताने मार जाते है, अगर इनसे कुछ पूछो, तो बोलते है फलां के बेटे इतने कमाते है, अरे भाई बेरोजगारों का भी दिल होते है, घर पे बैठ के भी न चैन से ये सोते है, अगर पैसा कमाये तो राजाबेटा, नही तो ये काम चोर होते है, वैसे तो ये बहुत जरूरी होते है, फिर लोग जाने क्यों इन्हें बेरोज़गार कहते है, घर का ये सारे काम कर लाते है, फिर भी ये बेरोज़गार कहलाते है, - इ० यशवन्त दुबे 'मयंक'

दोस्ती

किसी के लिए दोस्ती प्यार है, कोई कहता है  सच्चा यार है, कोई दोस्ती को समझता व्यापार है, लेकिन दोस्ती का केवल वो हकदार है, जो दोस्त के लिए हमेशा तैयार है, दोस्तों के साथ समय का पता नही चलता, बैठे रहते है बातों में दिन भर, फिर भी  ये दिल नही भरता, दोस्ती  में लोग कुछ भी कर जातें है, दोस्त अगर मुसीबत में हो तो हद से गुजर जातें है, दोस्ती में अमीर- गरीब ,छोटा-बड़ा नही होता है, ये तो दिल का रिश्ता है  जो क़द्र करता है वही बोता है -इ० यशवन्त दुबे 'मयंक'

माँ

 "   माँ    "  माँ तो माँ होती है बच्चे गर शैतान करे तो  बच्चो को डांटती है  दर्द होता अगर बच्चे को तो ये खुद रो देती है माँ तो माँ होती है अपने लिए चाहती नही कुछ फिकर हमेशा बच्चो की होती है बैसे तो है सीधी सी वो गर आती कभी मुसीबत बच्चो पे तो दुर्गा बनकर हर लेती है माँ तो माँ होती है बच्चा भले नाराज रहे पर  वो कभी नाराज न रहती है परिस्तिथि हो चाहे जैसी भी उसकी ममता में कभी कमी नही होती है माँ तो माँ होती है - इ० यशवन्त दुबे 'मयंक '

पालघर मोबलिंचिंग

व्यथित हुआ मन देख कर हिंसा संतो पर, संत त्याग देते इच्छाएं सारी मन रहे बस प्रभु पर, प्रभु की तलाश में जो घूमते है इस धरा पर, जो करते काम अहिंसा के बनाते है देश को सुंदर, उस सन्त को मारा तुमने किस अपराध से, क्या ले लिया उसने तुम्हारा या निज स्वार्थ से, अगर स्वार्थ भी हुआ तो क्या तुम जान ले लोगे, नफ़रत भी अगर है तुमको तो क्या प्राण ले लोगे, साधु अवग्या का फल भी तुम सह न पाओगे, यह क्रूर कृत्य करके क्या तुम बच जाओगे, अरे कहा कभी कोई बच पाया साधु के श्राप से, फिर तुमने कैसे सोच लिया कि बच जाओगे इस घोर अपराध से, कोई नही बचा पायेगा चाहे जोर लगाओ जितना, जितना उसने सहा था उस दिन सहना पड़ेगा तुमको उतना, उस भीड़ में केवल उनका एक सहारा खाकी थी तुमने भी हाथ झटक दिया  तोड़ दी जो आखरी आस बाक़ी थी तुम भी गुनहगार हो उस भीड़ के संग में, बदनाम किया खाकी को  रंग लिए हाथ उनके खून के रंग में, भीड़ में जाके मरोगे तो क्या बच जाओगे, इन अवसरवादी सरकारों के पीछे भी गर छिप जाओगे, पर इस कालचक्र के प्रभाव से तुम बच न पाओगे,🙏🇮🇳 -इ० यशवन्त दुबे 'मयंक'

कोरोना

"कोरोना से डरो-ना" देश पे आया संकट भारी, लोग कहे इसको महामारी, कहते है चाइना से है ये आया, लेकिन भारत में ये टिक न पाया, अगर रहोगे घर के अंदर, तो बन जाओगे आप सिकन्दर, लोकडाउन का करो सदुपयोग, नित्य करो तुम ध्यान और योग, योगा से आती है शक्ति, साथ में करना प्रभु की भक्ति, घर में रहकर मत घबराना, सबको तुम साहस बधवाना, रामायण का पाठ सिखाना, नयी चीज़ों में रूचि दिखाना, कोरोना को मिलकर है हराना, कहत  इ० यशवन्त करो तुम ये तैयारी, देश बनेगा महान 21वीं सदी हमारी... -इ० यशवन्त दुबे 'मयंक'